
केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं। कर्मचारी संगठनों की ओर से वेतन बढ़ाने की मांग भी उठने लगी है। हाल ही में Federation of National Postal Organisations (FNPO) ने सरकार को एक प्रस्ताव भेजा है जिसमें कहा गया है कि केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹54,000 की जाए और Fitment Factor 3.0 रखा जाए।
अगर ऐसा होता है तो वर्तमान में मिलने वाली ₹18,000 की न्यूनतम बेसिक सैलरी तीन गुना तक बढ़ सकती है। लेकिन सवाल यह है कि कर्मचारी संगठन आखिर ₹54,000 की मांग क्यों कर रहे हैं? और 3.0 Fitment Factor का आधार क्या है ? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
Fitment Factor क्या होता है ?
Fitment Factor वह संख्या होती है जिसके आधार पर पुराने वेतन को नए वेतन में बदला जाता है। उदाहरण के लिए अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹18,000 है और Fitment Factor 3.0 लागू हो जाता है तो नई सैलरी होगी: ₹18,000 × 3 = ₹54,000 । पिछले वेतन आयोगों में यह Factor कम था।
- 6वें वेतन आयोग में Fitment Factor लगभग 1.92 था
- 7वें वेतन आयोग में यह बढ़कर 2.57 हो गया
अब कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि 8वें वेतन आयोग में इसे 3.0 या उससे अधिक किया जाए।
न्यूनतम वेतन तय करने का तरीका क्या है ?
न्यूनतम वेतन तय करने के लिए भारत में एक पुराना और मान्य तरीका अपनाया जाता है। यह तरीका 1957 की 15वीं इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस (ILC) के मानकों पर आधारित है। इन मानकों के अनुसार किसी कर्मचारी के परिवार के लिए जरूरी चीजों का एक खर्च का अनुमान (Consumption Basket) तैयार किया जाता है।
इसमें रोजमर्रा की आवश्यक चीजें शामिल होती हैं जैसे:
- चावल और गेहूं
- दालें
- सब्जियां और फल
- दूध
- तेल और चीनी
- अंडे, मांस और मछली
- कपड़े
- ईंधन और बिजली
- पानी का खर्च
इन सभी चीजों की कीमत अलग-अलग शहरों में देखकर औसत निकाला जाता है।
FNPO ने खर्च कैसे निकाला ?
FNPO ने देश के कई बड़े शहरों के रिटेल दामों का औसत लेकर खर्च का अनुमान लगाया। इसमें दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, भुवनेश्वर और तिरुवनंतपुरम जैसे शहर शामिल थे। इनके आधार पर जरूरी चीजों का मासिक खर्च लगभग ₹19,940 निकला। इसके बाद कुछ अन्य जरूरी खर्च भी जोड़े गए:
| खर्च | अनुमानित राशि |
|---|---|
| जरूरी वस्तुएं | ₹19,940 |
| बिजली, पानी और ईंधन | ₹6,066 |
| सामाजिक खर्च | ₹7,886 |
| हाउसिंग खर्च | ₹2,563 |
| स्किल डेवलपमेंट | ₹9,184 |
इन सभी को जोड़ने के बाद कुल न्यूनतम वेतन लगभग ₹45,918 यानी करीब ₹46,000 बनता है।
परिवार के सदस्यों के आधार पर वेतन
यह गणना 3 सदस्यीय परिवार (पति-पत्नी और एक बच्चा) के आधार पर की गई है। इस हिसाब से न्यूनतम वेतन लगभग ₹46,000 निकलता है। लेकिन कर्मचारी संगठनों का कहना है कि आजकल परिवार में माता-पिता भी साथ रहते हैं, इसलिए 5 सदस्यों के परिवार को आधार मानना चाहिए। अगर ऐसा किया जाए तो न्यूनतम वेतन लगभग ₹76,000 तक पहुंच सकता है।
फिर ₹54,000 की मांग क्यों?
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में महंगाई तेजी से बढ़ी है। खासकर कोविड के बाद कई खर्च बढ़ गए हैं। जैसे – मेडिकल खर्च , घर का किराया, इंटरनेट और मोबाइल खर्च, एलपीजी गैस। इसी वजह से FNPO ने सुझाव दिया है कि 8वें वेतन आयोग में कम से कम ₹54,000 न्यूनतम बेसिक वेतन तय किया जाए।
क्या सच में 8th Pay Commission में सैलरी ₹54,000 हो सकती है ?
अगर सरकार 3.0 Fitment Factor को स्वीकार कर लेती है तो यह संभव है। क्योंकि: ₹18,000 × 3 = ₹54,000 , हालांकि अभी यह सिर्फ कर्मचारी संगठनों की मांग है। अंतिम फैसला 8वें वेतन आयोग की सिफारिश और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।
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