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Reading: मिट्टी का तेल (Kerosene Oil) क्यों बंद हुआ ? जानिए असली 5 कारण और Shocking Facts
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मिट्टी का तेल (Kerosene Oil) क्यों बंद हुआ ? जानिए असली 5 कारण और Shocking Facts

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Last updated: 26.05.2026 1:58 PM
Devendra Kumar
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मिट्टी का तेल (Kerosene Oil) क्यों बंद हुआ
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मिट्टी का तेल (Kerosene Oil) क्यों बंद हुआ
मिट्टी का तेल (Kerosene Oil) क्यों बंद हुआ ?

याद है वो लाल-पीला कनस्तर जो घर के कोने में रखा रहता था? जिसमें भरा होता था एक तीखी गंध वाला तेल – मिट्टी का तेल, जिसे आप केरोसिन (Kerosene Oil) भी कहते हैं। देश के लाखों घरों में यही तेल जलाता था चूल्हा, यही रोशनी देता था लालटेन को। गांव की उन रातों में जब बिजली नहीं होती थी, केरोसिन की लालटेन ही एकमात्र उम्मीद होती थी। लेकिन धीरे-धीरे यह तेल हमारी ज़िंदगी से गायब होता चला गया। आज की नई पीढ़ी के बहुत से लोगों ने शायद इसका नाम भी नहीं सुना।

आखिर क्यों बंद हुआ मिट्टी का तेल ? क्या सरकार ने जानबूझकर इसे बंद किया ? इस सिस्टम में कितना भ्रष्टाचार था ? और आज 2026 में इसकी क्या स्थिति है ? इन सभी सवालों के जवाब आज इस ब्लॉग में मिलेंगे। मिट्टी के तेल की कहानी सिर्फ एक ईंधन की कहानी नहीं है – यह भारत की गरीबी, सरकारी नीतियों की खामियों, और बदलाव की कोशिशों की पूरी दास्तान है।

मिट्टी का तेल होता क्या है ?

केरोसिन यानी मिट्टी का तेल एक खनिज तेल है जो कच्चे पेट्रोलियम (Crude Petroleum) से निकाला जाता है। जमीन के अंदर से निकलने की वजह से ही इसे हिंदी में “मिट्टी का तेल” कहा जाने लगा। कुछ जगहों पर इसे “घासलेट” भी बोला जाता है। यह 175°C से 275°C के तापमान पर आसवन (Distillation) प्रक्रिया से बनता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से रोशनी के लिए लालटेन और दीपक में, खाना पकाने के लिए केरोसिन स्टोव में, ट्रैक्टर और छोटे इंजन चलाने में, और दवाइयों में विलायक के रूप में किया जाता रहा है।

2011 की जनगणना के अनुसार भारत के 43% ग्रामीण घरों में रोशनी का मुख्य साधन केरोसिन ही था। एक समय में देश में करोड़ों लीटर केरोसिन हर महीने राशन की दुकानों यानी PDS से बांटा जाता था।

सरकारी वितरण प्रणाली – PDS Kerosene क्या था ?

मिट्टी का तेल (Kerosene Oil) क्यों बंद हुआ ? जानिए असली 5 कारण और Shocking Facts

आज़ादी के बाद से भारत सरकार ने गरीब परिवारों को सस्ते दाम पर केरोसिन देने के लिए Public Distribution System यानी सार्वजनिक वितरण प्रणाली शुरू की। राशन कार्ड पर हर महीने एक तय मात्रा में केरोसिन मिलता था – बाजार की कीमत से बहुत कम दाम पर। यह योजना उन करोड़ों लोगों के लिए बहुत जरूरी थी जिनके घरों में न बिजली थी, न LPG गैस का कनेक्शन था। मिट्टी के तेल पर सब्सिडी उनके लिए सचमुच एक जीवन रेखा की तरह थी।

लेकिन जैसे-जैसे वक्त बीता, यही सिस्टम भ्रष्टाचार का अड्डा बनता चला गया। और एक दिन आया जब सरकार को मजबूरन इस पूरे ढांचे को बंद करना पड़ा।

मिट्टी का तेल बंद क्यों हुआ ? – असली 5 कारण

1. भारी भ्रष्टाचार और चोरी

मिट्टी के तेल के बंद होने का सबसे बड़ा कारण था इस सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार। सरकारी रिपोर्टों के मुताबिक, सन 2011-12 में PDS के जरिए बांटे जाने वाले कुल केरोसिन का 41 प्रतिशत हिस्सा चोरी और रिसाव में चला जाता था। इससे सरकारी खजाने को करीब 8,300 करोड़ रुपये का नुकसान सिर्फ एक साल में हुआ।

उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और गुजरात में सबसे ज्यादा केरोसिन की चोरी होती थी क्योंकि वहां सबसे ज्यादा आवंटन था। राशन डीलर सस्ता केरोसिन ब्लैक मार्केट में बेच देते थे और असली लाभार्थियों को या तो बहुत कम मिलता था या फिर बिल्कुल नहीं।

सोचिए – जो तेल गरीबों के चूल्हे और लालटेन के लिए था, वो अमीरों की गाड़ियों में मिलावट के रूप में जाता था। यह सिस्टम पूरी तरह खोखला हो चुका था।

2. पर्यावरण और स्वास्थ्य को नुकसान

केरोसिन जलाने से निकलने वाला धुआं घरों के अंदर की हवा को बेहद जहरीला बना देता था। महिलाओं और बच्चों में सांस की बीमारियां, आंखों में जलन और फेफड़ों के रोग का एक बड़ा कारण यही था। WHO की रिपोर्टों में भी इनडोर वायु प्रदूषण को एक गंभीर स्वास्थ्य खतरा माना गया है और केरोसिन इसमें एक प्रमुख भूमिका निभाता था।

इसके अलावा, गलती से केरोसिन गिरने पर आग लग जाती थी जिससे घर में दुर्घटनाएं होती थीं। बच्चों के गलती से पी जाने के मामले भी सामने आते थे।

मिट्टी का तेल (Kerosene Oil) क्यों बंद हुआ ? जानिए असली 5 कारण और Shocking Facts

3. उज्ज्वला योजना का आना – गेम चेंजर

2016 में मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) शुरू की। इसका मकसद था गरीब परिवारों की महिलाओं को मुफ्त LPG गैस कनेक्शन देना। इस योजना ने केरोसिन की जगह LPG को आम लोगों तक पहुंचाया। आज इस योजना के तहत देशभर में 10 करोड़ से भी ज्यादा LPG कनेक्शन दिए जा चुके हैं।

जब लोगों के घरों में गैस का साफ-सुथरा चूल्हा आ गया, तो मिट्टी के तेल की जरूरत खुद-ब-खुद कम होती चली गई। धुएं वाला स्टोव हट गया और उसकी जगह आ गया स्वच्छ ईंधन। उज्ज्वला योजना को दुनिया की सबसे बड़ी स्वच्छ ईंधन परियोजनाओं में से एक माना जाता है और इसी ने केरोसिन को सबसे बड़ा झटका दिया।

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4. बिजली का गांव-गांव तक विस्तार

सरकार के सौभाग्य योजना और अन्य ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यक्रमों के तहत देश के लगभग हर घर तक बिजली पहुंचाने की कोशिश की गई। जब घर रात में बिजली से रोशन होने लगे, तो लालटेन और केरोसिन की जरूरत अपने आप खत्म हो गई। पहले केरोसिन की सबसे बड़ी मांग रोशनी के लिए थी। बिजली ने वो काम कर दिया जो केरोसिन करता था – और वो भी बिना धुएं और बदबू के।

5. सब्सिडी का धीरे-धीरे खत्म होना

2016 से सरकार ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत केरोसिन की कीमतें हर दो हफ्ते में थोड़ी-थोड़ी बढ़ानी शुरू कीं। यह प्रक्रिया धीरे-धीरे हुई ताकि एकदम से गरीब परिवारों पर बोझ न पड़े। और फरवरी 2021 तक केरोसिन पर दी जाने वाली सब्सिडी पूरी तरह समाप्त कर दी गई। जब केरोसिन बाजार में महंगा हो गया और LPG सस्ते में मिल रही थी, तो लोगों ने खुद ही मिट्टी का तेल छोड़ दिया।

यह भी पढ़ें : अगर भारत में इंटरनेट 24 घंटे बंद हो जाए तो क्या होगा 

मिट्टी के तेल का इतिहास – एक नज़र में

1890 के दशक – भारत में असम के दिगबोई में पहली बार तेल की खोज हुई और केरोसिन का उपयोग शुरू हुआ।

1947 के बाद – आज़ादी के बाद PDS के तहत सस्ता केरोसिन गरीब परिवारों में बांटना शुरू हुआ।

2002 – Administered Price Mechanism (APM) खत्म किया गया, लेकिन तब भी सब्सिडी जारी रखने का वादा किया गया।

2016 – उज्ज्वला योजना शुरू हुई और केरोसिन की कीमतें बढ़ानी शुरू हुईं।

फरवरी 2021 – केरोसिन पर सब्सिडी पूरी तरह बंद। कई राज्यों ने वितरण रोकना शुरू किया।

मार्च 2026 – पश्चिम एशिया संकट के कारण LPG की किल्लत हुई और सरकार ने एक बार फिर PDS में केरोसिन को शामिल किया।

क्या मिट्टी का तेल पूरी तरह खत्म हो गया ?

नहीं ! और यहीं इस कहानी का सबसे दिलचस्प मोड़ है।

2026 की शुरुआत में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते LPG की सप्लाई में भारी बाधा आई। इससे देशभर में गैस सिलेंडरों की किल्लत होने लगी। इस आपातस्थिति से निपटने के लिए सरकार को मजबूरन केरोसिन को दोबारा PDS और पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध कराना पड़ा – देश के 21 राज्यों में। पेट्रोल पंपों पर अब 5,000 लीटर तक केरोसिन स्टोर करने की अनुमति दी गई।

यह दिखाता है कि केरोसिन भले ही सामान्य दिनों में जरूरी न लगे, लेकिन आपात स्थिति में यह अभी भी एक महत्वपूर्ण बैकअप ईंधन है। विशेषज्ञों ने सरकार से अपील की है कि यह एक अस्थाई उपाय होना चाहिए और साथ-साथ उज्ज्वला योजना के तहत LPG कनेक्शन और तेज़ी से दिए जाने चाहिए।

मिट्टी के तेल के फायदे और नुकसान

फायदे:

  • सस्ता और लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है।
  • बिजली और गैस न हो तो काम आता है।
  • आपातकाल में एक भरोसेमंद बैकअप।
  • दूर-दराज के इलाकों में आसानी से पहुंचाया जा सकता है।

नुकसान:

  • धुएं से स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान।
  • आग लगने का खतरा हमेशा बना रहता है।
  • भ्रष्टाचार और कालाबाजारी का बड़ा अड्डा।
  • पर्यावरण को प्रदूषित करता है।
  • गरीब लाभार्थियों तक पहुंचने की बजाय ब्लैक मार्केट में जाता था।

मिट्टी का तेल गया, पर गया नहीं

मिट्टी का तेल बंद होना एक रात में नहीं हुआ। यह एक लंबी और जटिल प्रक्रिया थी जिसमें सरकार की नीतियां, उज्ज्वला योजना, ग्रामीण विद्युतीकरण, और भ्रष्टाचार पर लगाम – सभी ने मिलकर काम किया। आज केरोसिन बीते जमाने की बात लगती है। लेकिन 2026 में जब LPG की किल्लत हुई, तो यही “पुराना” ईंधन करोड़ों घरों की मदद के लिए वापस बुलाया गया।

सच यह है कि मिट्टी का तेल न पूरी तरह गया है, न पूरी तरह भुलाया जा सकता है। यह भारत की ऊर्जा यात्रा का एक अटूट हिस्सा है – एक ऐसा हिस्सा जो हमें याद दिलाता है कि गरीब की रोशनी और चूल्हे की जिम्मेदारी हमेशा सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा रही है।

अगर यह ब्लॉग आपको पसंद आया तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें और नीचे कमेंट करें – आपके घर में आखिरी बार मिट्टी का तेल कब इस्तेमाल हुआ था ?

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