Model Standing Orders 2026 : जानें श्रमिकों के अधिकार और नियोक्ताओं की जिम्मेदारियां – Major New Update

Devendra Kumar
11 Min Read
Model Standing Orders 2026

क्या है मॉडल स्थायी आदेश 2026 ?

भारत सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 8 मई 2026 को मॉडल स्थायी आदेश, 2026 (Model Standing Orders 2026) जारी किया। यह अधिसूचना भारत के राजपत्र (Gazette of India) में प्रकाशित हुई और उसी दिन से लागू हो गई। यह नई अधिसूचना औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 (Industrial Relations Code, 2020) की धारा 29 की उपधारा (1) के अंतर्गत बनाई गई है और पुराने Industrial Employment (Standing Orders) Central Rules, 1946 को इन क्षेत्रों के संदर्भ में supersede करती है।

सरल शब्दों में कहें तो यह एक standard template (मानक प्रारूप) है जो यह तय करता है कि कंपनियां और औद्योगिक संस्थान अपने कर्मचारियों के साथ कैसा व्यवहार करें – चाहे वह भर्ती हो, काम के घंटे हों, छुट्टी की नीति हो, या अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।

किन क्षेत्रों पर लागू होता है यह आदेश ?

मॉडल स्थायी आदेश 2026 तीन प्रमुख क्षेत्रों के लिए अलग-अलग अनुसूचियां (Schedules) लेकर आया है:

अनुसूचीक्षेत्रनाम
अनुसूची-क (Schedule A)खनन क्षेत्रMines Sector Standing Orders, 2026
अनुसूची-ख (Schedule B)विनिर्माण क्षेत्रManufacturing Sector Standing Orders, 2026
अनुसूची-ग (Schedule C)सेवा क्षेत्रService Sector Standing Orders, 2026

हर क्षेत्र की अपनी विशेषताएं और जरूरतें होती हैं, इसलिए इन्हें अलग-अलग रखा गया है। हालांकि अधिकांश प्रावधान तीनों में समान हैं।

कर्मचारियों की श्रेणियां : कौन है कौन ?

Model Standing Orders 2026 : जानें श्रमिकों के अधिकार और नियोक्ताओं की जिम्मेदारियां – Major New Update

इस आदेश के तहत कामगारों (workers) को 7 श्रेणियों में बांटा गया है :

  1. स्थायी (Permanent) – वह कर्मचारी जिसने 6 महीने की probation period सफलतापूर्वक पूरी कर ली हो।
  2. अस्थायी (Temporary) – सीमित अवधि के अस्थायी कार्य के लिए रखा गया कर्मचारी।
  3. अप्रेंटिस (Apprentice) – Apprenticeship Act, 1961 के तहत प्रशिक्षण लेने वाला व्यक्ति।
  4. प्रोबेशनर (Probationer) – स्थायी पद के लिए अनंतिम रूप से नियुक्त व्यक्ति जिसने 6 महीने पूरे नहीं किए।
  5. बदली (Badli) – अस्थायी अनुपस्थित स्थायी कर्मचारी की जगह नियुक्त कर्मचारी।
  6. निश्चित अवधि रोजगार (Fixed Term Employment) – लिखित अनुबंध के आधार पर निश्चित समय के लिए नियुक्ति।
  7. अनियत (Casual) – आकस्मिक प्रकृति के काम के लिए रखा गया कर्मचारी।

महत्वपूर्ण: Fixed Term Employment में कार्यरत कर्मचारियों को भी स्थायी कर्मचारियों के बराबर वेतन, भत्ते और सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही 1 वर्ष की सेवा पर ग्रेच्युटी का अधिकार भी रहेगा।

मुख्य प्रावधान : क्या नया है इस आदेश में ?

1. पहचान पत्र (Identity Badge/Card)

हर कर्मचारी को एक पहचान बैज या कार्ड जारी किया जाएगा जिसमें उसका नाम, designation, employee number, blood group, contact number और फोटो होगी। यह कार्ड किसी दूसरे को transfer नहीं किया जा सकता।

2. काम के समय का प्रकाशन

काम के घंटे, शिफ्ट की संख्या और समय नोटिस बोर्ड या electronic notice board पर हिंदी, अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में प्रदर्शित किए जाने चाहिए।

3. मजदूरी का भुगतान

नियोक्ता को मजदूरी का भुगतान इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से कर्मचारी के बैंक खाते में करना होगा। यदि कर्मचारी की सेवा समाप्त होती है (निष्कासन, बर्खास्तगी, छंटनी, या इस्तीफा), तो 2 कार्य दिवसों के भीतर देय मजदूरी का भुगतान करना अनिवार्य है।

4. शिफ्ट परिवर्तन की सूचना

किसी भी शिफ्ट को बंद या शुरू करने से पहले कर्मचारियों को 21 दिन की पूर्व सूचना देना जरूरी है। आपातकालीन परिस्थितियों में यह नियम शिथिल हो सकता है, लेकिन Grievance Redressal Committee की सलाह लेनी होगी।

5. सेवा अभिलेख (Service Record)

हर कर्मचारी का विस्तृत सेवा कार्ड (Service Card) रखना अनिवार्य है जिसमें 40 से अधिक विवरण दर्ज होंगे – जन्मतिथि, आधार, PAN, UAN, शैक्षिक योग्यता, प्रशिक्षण, पदोन्नति, अनुशासनात्मक कार्रवाई आदि। सेवा समाप्ति, सेवानिवृत्ति या इस्तीफे के 10 दिनों के भीतर service certificate जारी करना होगा।

6. सेवानिवृत्ति की आयु

यदि नियोक्ता और कर्मचारी के बीच कोई लिखित समझौता नहीं है, तो 58 वर्ष की आयु पर सेवानिवृत्ति होगी।

अनुशासनात्मक कार्रवाई : क्या माना जाएगा “किया-कुकृत्य” (Misconduct) ?

मॉडल स्थायी आदेश 2026 में misconduct की विस्तृत सूची दी गई है। नियोक्ता इन आधारों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकते हैं:

  • चोरी, धोखाधड़ी या बेईमानी
  • रिश्वत लेना या देना
  • वरिष्ठ अधिकारी के आदेश की जानबूझकर अवज्ञा
  • आदतन देरी से आना या बिना छुट्टी के अनुपस्थित रहना
  • ड्यूटी के दौरान शराब पीना, लड़ाई-झगड़ा करना
  • काम की आदतन उपेक्षा
  • ड्यूटी पर सोना
  • बिना अनुमति 10 दिन से अधिक निरंतर अनुपस्थिति
  • अवैध हड़ताल पर जाना (14 दिन की पूर्व सूचना दिए बिना)
  • कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) – यह Sexual Harassment of Women at Workplace Act, 2013 के तहत परिभाषित है
  • सेवा क्षेत्र के लिए विशेष: नियोक्ता/ग्राहक के IT system या computer network में अनधिकृत पहुंच

“Habitual” (आदतन) की परिभाषा

यदि कोई कर्मचारी पिछले 12 महीनों में 3 या उससे अधिक बार misconduct करता है, तो उसे “आदतन” माना जाएगा।

निलंबन के दौरान निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance)

जांच के दौरान निलंबित कर्मचारी को निर्वाह भत्ता देना अनिवार्य है:

  • पहले 90 दिन: अंतिम प्राप्त वेतन का 50%
  • इसके बाद: यदि देरी कर्मचारी के कारण नहीं है तो 75%

निलंबन की अवधि में जांच आमतौर पर 90 दिनों के भीतर पूरी होनी चाहिए।

सेवा क्षेत्र के लिए विशेष प्रावधान

Schedule C (Service Sector) में कुछ अतिरिक्त प्रावधान हैं जो IT, BPO, और अन्य सेवा उद्योगों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं:

  • Work from Home / Remote Work: नियोक्ता कर्मचारी को घर, दूरस्थ स्थान या virtual workplace से काम करने की अनुमति दे सकता है।
  • IT Sector के लिए: काम के घंटे नियोक्ता और कर्मचारी के बीच के समझौते के अनुसार हो सकते हैं।
  • State के बाहर Transfer: यह केवल कर्मचारी की सहमति से या नियुक्ति पत्र में उल्लिखित प्रावधान के अनुसार ही होगा।

शिकायत निवारण (Grievance Redressal)

सभी व्यक्तिगत शिकायतों को Grievance Redressal Committee के सामने रखा जा सकता है। इसके लिए आवेदन विवाद उत्पन्न होने की तारीख से 1 वर्ष के भीतर दायर करना होगा — यह Industrial Relations (Central) Rules, 2026 के Rule 7 के तहत है।

Internal Complaints Committee (ICC): यौन उत्पीड़न की शिकायतों के लिए प्रत्येक औद्योगिक संस्थान में ICC का गठन अनिवार्य है और यह समिति हर साल वार्षिक रिपोर्ट जिला अधिकारी को प्रस्तुत करेगी।

Transfer की नीति: क्या नियम हैं ?

हर कंपनी को एक Transfer Policy बनानी होगी और इसे HR Portal पर उपलब्ध कराना होगा। Transfer के मामले में:

  • कर्मचारी की मजदूरी, ग्रेड और सेवा की निरंतरता प्रभावित नहीं होगी
  • कर्मचारी को केवल वही काम दिया जाएगा जो वह करने में सक्षम है
  • एक राज्य से दूसरे राज्य में Transfer कर्मचारी की सहमति से होगा
  • Transfer पर यात्रा भत्ता और आकस्मिक खर्च का 50% अलग से दिया जाएगा

मॉडल स्थायी आदेश अपनाने की प्रक्रिया

यदि कोई नियोक्ता इन मॉडल आदेशों को अपनाता है, तो उसे :

  1. Certifying Officer को इलेक्ट्रॉनिक रूप से सूचित करना होगा
  2. एक बार अपनाए जाने पर ये आदेश उस नियोक्ता की सभी industrial units पर लागू होंगे, चाहे वे कहीं भी स्थित हों
  3. इन आदेशों की एक प्रति हिंदी, अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में Notice Board या HR Portal पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करनी होगी

किस कानून के तहत आया यह आदेश ?

यह अधिसूचना इन नए Labour Codes से जुड़ी है :

कानूनउद्देश्य
Industrial Relations Code, 2020औद्योगिक संबंध, हड़ताल, तालाबंदी
Code on Social Security, 2020PF, Gratuity, ESI आदि
Code on Wages, 2019न्यूनतम मजदूरी, भुगतान
Occupational Safety, Health & Working Conditions Code, 2020काम की सुरक्षा और स्वास्थ्य

नियोक्ताओं को क्या करना चाहिए ?

अभी से ये कदम उठाएं :

अपनी कंपनी के लिए लागू Schedule (A, B या C) की पहचान करें
मौजूदा HR Policies की समीक्षा करें और इन आदेशों के अनुरूप अपडेट करें
Transfer Policy बनाएं और HR Portal पर अपलोड करें
सभी कर्मचारियों के Service Cards अपडेट करें
Internal Complaints Committee (ICC) का गठन सुनिश्चित करें
Certifying Officer को electronically सूचित करें
Notice Board पर आदेशों की प्रति हिंदी/अंग्रेजी/स्थानीय भाषा में लगाएं

कर्मचारियों के लिए क्या मायने रखता है यह आदेश ?

यदि आप एक कर्मचारी हैं तो जान लें :

  • Fixed Term पर काम करने वाले भी स्थायी कर्मचारियों के बराबर वेतन और लाभ पाने के हकदार हैं
  • निलंबन के दौरान आपको subsistence allowance मिलेगा
  • जांच पूरी न होने पर 90 दिन बाद 75% भत्ते का अधिकार है
  • किसी भी misconduct आरोप पर आपको अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा
  • 58 वर्ष की आयु तक नौकरी सुरक्षित है (जब तक कोई अलग समझौता न हो)
  • यौन उत्पीड़न की शिकायत के लिए ICC में जाने का अधिकार है

मॉडल स्थायी आदेश, 2026 भारतीय श्रम कानून में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह नियोक्ता और कर्मचारी दोनों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश प्रदान करता है। नए Labour Codes के framework में इसे लागू करने का उद्देश्य workplace transparency, worker protection और industrial harmony को बढ़ावा देना है।

खनन, विनिर्माण और सेवा – तीनों प्रमुख क्षेत्रों के लिए अलग-अलग आदेश बनाकर सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि हर उद्योग की विशिष्ट जरूरतें पूरी हों। नियोक्ताओं को चाहिए कि वे इन आदेशों का अध्ययन करें और जल्द से जल्द अपनी HR policies को update करें।

स्रोत: भारत का राजपत्र, असाधारण – भाग II, खंड 3(ii), दिनांक 8 मई 2026 | श्रम और रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार

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